Vibe Movie Review:
Vibe Movie Review: बॉलीवुड में जब स्पाई फिल्मों का मतलब बड़े मिशन, खतरनाक विलेन और देशभक्ति से भरे डायलॉग्स तक सीमित होता जा रहा है, ऐसे में कुणाल केम्मु की ‘वाइब’ एक अलग रास्ता चुनने की कोशिश करती है। फिल्म एक स्पाई कहानी को कॉमेडी और दोस्ती के साथ जोड़ती है और आम लोगों को अचानक ऐसे मिशन का हिस्सा बना देती है, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
शुरुआत में फिल्म का अंदाज काफी हल्का-फुल्का और मजेदार रहता है। हालांकि, कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, खासकर इंटरवल के बाद, इसका टोन बदलने लगता है। यही बदलाव फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर सामने आता है।
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कहानी: दो आम दोस्तों के हाथ में देश की जिम्मेदारी
कहानी हार्दिक (कुणाल केम्मु) के इर्द-गिर्द घूमती है। हार्दिक की जिंदगी कुछ समय पहले तक नशे की समस्या से जूझ रही थी और अब वह अपने सबसे करीबी दोस्त बगिरथ उर्फ बग्स (स्पार्श श्रीवास्तव) के सहारे अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है।
बग्स एक टैलेंटेड सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट है। वह अपने दोस्त को एक कंपनी में मार्केटिंग की नौकरी दिला देता है, ताकि हार्दिक भी सामान्य जिंदगी जीना शुरू कर सके। इसी दौरान हार्दिक की मुलाकात कंपनी की नई इंटर्न करीना (वंशिका धर) से होती है और कहानी एक अलग दिशा में मुड़ जाती है।
कुछ घटनाओं के बाद दोनों दोस्तों को एक गुप्त मिशन में शामिल कर लिया जाता है। उन्हें इस काम के लिए चुनती हैं रहस्यमयी इंटेलिजेंस अधिकारी मैडम एच (प्रीति जिंटा)। अब जिन दो लोगों को देखकर कोई उन्हें जासूस नहीं समझेगा, उनके ऊपर देश से जुड़ी एक बड़ी जिम्मेदारी आ जाती है।
पहले 90 मिनट में कॉमेडी सबसे मजबूत
‘वाइब’ का सबसे मनोरंजक हिस्सा इसका पहला हाफ है। करीब 146 मिनट लंबी इस फिल्म के शुरुआती 90 मिनट में कॉमेडी अच्छी तरह काम करती है।
कुणाल केम्मु ने कहानी में सिर्फ पंचलाइन पर निर्भर रहने के बजाय परिस्थितियों से हास्य पैदा करने की कोशिश की है। हार्दिक के अजीब रिएक्शन, उसकी घबराहट और मुश्किल परिस्थितियों में फंसने के तरीके कई जगह स्वाभाविक हंसी पैदा करते हैं।
फिल्म में कुछ ऐसे सीन भी हैं जहां सामान्य डेट या छोटी-सी परिस्थिति धीरे-धीरे पूरी तरह अजीब स्थिति में बदल जाती है। यही फिल्म के कॉमिक टोन को मजेदार बनाता है।
हार्दिक और बग्स की दोस्ती फिल्म की ताकत
फिल्म का एक अच्छा पहलू इसकी दोस्ती है। हार्दिक और बग्स किसी पारंपरिक बॉलीवुड जोड़ी की तरह पेश नहीं किए गए हैं।
दोनों डरते हैं, परेशान होते हैं, गलतियां करते हैं और कई बार अपनी जान बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार नजर आते हैं। फिल्म उनकी कमजोरियों को छिपाने के बजाय उन्हें कहानी का हिस्सा बनाती है।
यही वजह है कि दोनों किरदार शुरुआत में काफी रिलेटेबल लगते हैं।
एक्टिंग: कुणाल और स्पार्श ने संभाला मोर्चा
कुणाल केम्मु हार्दिक के किरदार में पूरी तरह कॉमेडी पर निर्भर नहीं रहते। उनके चेहरे के एक्सप्रेशन, बॉडी लैंग्वेज और घबराए हुए रिएक्शन किरदार को अलग पहचान देते हैं।
स्पार्श श्रीवास्तव भी बग्स के रोल में अच्छे लगते हैं। उनका किरदार हार्दिक के मुकाबले ज्यादा शांत और समझदार है, लेकिन दोस्त की हरकतों से परेशान होने के बावजूद उसका साथ नहीं छोड़ता। दोनों की केमिस्ट्री फिल्म के शुरुआती हिस्से को मजबूत बनाती है।
प्रीति जिंटा मैडम एच के किरदार में लंबे समय बाद एक अलग अंदाज में नजर आती हैं। उनका किरदार एक सख्त और रहस्यमयी इंटेलिजेंस बॉस का है। हालांकि, कुछ जगह उनके डायलॉग और मोनोलॉग थोड़े ज्यादा लिखे हुए महसूस होते हैं और स्वाभाविकता कम हो जाती है।
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इंटरवल के बाद बदल जाता है फिल्म का मूड
फिल्म की सबसे बड़ी समस्या दूसरे हाफ में सामने आती है।
कहानी जब थाईलैंड पहुंचती है, तो ‘वाइब’ की कॉमेडी धीरे-धीरे पीछे चली जाती है और फिल्म एक्शन-थ्रिलर का रूप लेने लगती है। समस्या यह नहीं कि फिल्म एक्शन करती है, बल्कि परेशानी यह है कि यह बदलाव काफी अचानक महसूस होता है।
जिस फिल्म ने पहले हिस्से में अपने किरदारों की बेवकूफियों और दोस्ती के जरिए माहौल बनाया था, वही बाद में बड़े एक्शन सीक्वेंस और गंभीर मिशन पर ज्यादा जोर देने लगती है।
इससे फिल्म की शुरुआती सहजता कुछ हद तक खत्म हो जाती है।
देशभक्ति पर मजाक करने की कोशिश, लेकिन पूरी तरह सफल नहीं
‘वाइब’ बॉलीवुड की पारंपरिक स्पाई और देशभक्ति फिल्मों पर हल्का व्यंग्य करने की कोशिश भी करती है। फिल्म यह दिखाने का प्रयास करती है कि पर्दे पर दिखने वाला सुपरहीरो जैसा एजेंट असल जिंदगी में कितना अलग हो सकता है।
लेकिन फिल्म इस विचार को पूरी तरह विकसित नहीं कर पाती। कुछ जगह यह साफ नहीं रहता कि किसी सीन को गंभीरता से लिया जाना है या उसके मजाकिया पहलू को।
यही असमंजस दूसरे हाफ के प्रभाव को थोड़ा कमजोर करता है।
‘सिपाही-1’ और फिल्म का दिलचस्प आइडिया
फिल्म का एक दिलचस्प कॉन्सेप्ट ‘सिपाही-1’ सीरम है। इसके जरिए हार्दिक को एक तरह के सुपर-सोल्जर में बदलने की कोशिश की जाती है।
यह कहानी सिर्फ एक एक्शन डिवाइस नहीं है। इसके जरिए फिल्म उस बॉलीवुड फॉर्मूले पर भी टिप्पणी करती है जिसमें हीरो को हमेशा ताकतवर, निडर और हर परिस्थिति में जीतने वाला दिखाया जाता है।
‘वाइब’ इस आइडिया को कॉमेडी के जरिए उलटने की कोशिश करती है—एक आम आदमी को जब अचानक फिल्मी हीरो जैसी ताकत मिल जाए तो उसका व्यवहार कैसा होगा?
यह विचार फिल्म के ज्यादा मजेदार कॉन्सेप्ट्स में से एक है, हालांकि इसे और बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता था।
डायरेक्शन: प्रयोग हैं, लेकिन हर प्रयोग काम नहीं करता
कुणाल केम्मु ने बतौर निर्देशक फिल्म को सिर्फ पारंपरिक स्पाई कॉमेडी बनाने की कोशिश नहीं की है। रनवे चेज, स्लो-मोशन एंट्री और कॉम्बैट सीक्वेंस जैसे कई स्टाइलिश एलिमेंट्स शामिल किए गए हैं।
कुछ जगह ये प्रयोग फिल्म को अलग पहचान देते हैं, लेकिन कई बार ऐसा लगता है कि स्टाइल कहानी से आगे निकल गया है।
फिल्म की असली ताकत इसके किरदार और कॉमेडी हैं। जब कहानी इन दोनों चीजों पर रहती है, तब ‘वाइब’ ज्यादा प्रभावी लगती है।
क्या ‘वाइब’ देखने लायक है?
‘वाइब’ एक ऐसी फिल्म है जो अपने पहले हिस्से में खूब एंटरटेन करती है, लेकिन दूसरे हाफ में अपनी बनाई हुई लय को कायम नहीं रख पाती।
पहला हाफ — दोस्ती, कॉमेडी और अजीब परिस्थितियों की वजह से काफी मनोरंजक है।
दूसरा हाफ — एक्शन और गंभीर कहानी पर ज्यादा निर्भर हो जाता है, जिससे शुरुआती मजा कुछ कम पड़ता है।
अगर आपको हल्की-फुल्की स्पाई कॉमेडी पसंद है और आप दो आम दोस्तों को असामान्य मिशन में फंसा देखना चाहते हैं, तो फिल्म आपको कई अच्छे पल दे सकती है। लेकिन अगर आप एक लगातार टाइट और गंभीर स्पाई थ्रिलर की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो फिल्म आपकी उम्मीदों से अलग दिशा में जा सकती है।
रेटिंग: ★★★½/5
Vibe Movie Review
| कैटेगरी | जानकारी |
| फिल्म | वाइब (Vibe) |
| निर्देशक | कुणाल केम्मु |
| मुख्य कलाकार | कुणाल केम्मु, स्पार्श श्रीवास्तव, प्रीति जिंटा, वंशिका धर |
| रिलीज डेट | 18 सितंबर 2026 |
| जॉनर | स्पाई कॉमेडी, एक्शन, ड्रामा |
| अवधि | 146 मिनट (2 घंटे 26 मिनट) |
| रिलीज | सिनेमाघर |
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