NEET Paper Leak Case
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया कि छात्रों की सुरक्षा और नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक और दीर्घकालिक सुधार लागू किए जा रहे हैं। यह आश्वासन जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष नीट-यूजी 2026 के कथित प्रश्नपत्र लीक मामले से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया गया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में केवल अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी और संस्थागत सुधार किए जाने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। अदालत ने कहा, “हम इस पूरे मामले पर लगातार नजर रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुव्यवस्थित हो।”

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार नीट पेपर लीक मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और छात्रों का भरोसा कायम रखने के लिए “10 कदम आगे बढ़कर” कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधारों पर काम कर रही है।
अदालत ने कहा कि इस तरह की गंभीर समस्याओं का समाधान केवल तात्कालिक कदमों से नहीं हो सकता। इसलिए केंद्र सरकार से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है, जिसमें अब तक उठाए गए कदमों और प्रस्तावित सुधारों की पूरी जानकारी हो। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की गई है।
यह मामला उन याचिकाओं से जुड़ा है, जो कथित बड़े पैमाने पर पेपर लीक के आरोपों के बाद केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द किए जाने के बाद दायर की गई थीं।
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अदालत को यह भी बताया कि सरकार ने राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। प्रस्तावित सुधारों में प्रश्नपत्रों की सुरक्षित छपाई, परिवहन, परीक्षा केंद्रों तक वितरण और पूरी प्रक्रिया की निगरानी को और मजबूत बनाने जैसे कदम शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही नीट परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) में बदलने की संभावनाओं, साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा से जुड़े उपायों पर भी विस्तृत जानकारी मांगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इन सभी सुधारों के क्रियान्वयन की पूरे वर्ष निगरानी करेगी। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
