Alwar Mein Tendue Ka Aatank
Alwar Mein Tendue Ka Aatank: राजस्थान के अलवर शहर के पुराने रिहायशी इलाकों में एक बार फिर तेंदुए की मौजूदगी ने लोगों में दहशत फैला दी है। लादिया और खदाना मोहल्लों में लगातार दो रात तेंदुए के देखे जाने की घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। इससे पहले भी ऐसी घटनाओं के चलते वन विभाग को इन इलाकों से तेंदुओं का रेस्क्यू करना पड़ा है।
सोमवार तड़के लादिया मोहल्ले में एक तेंदुआ आवारा कुत्तों का पीछा करते हुए सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ। शिकार की तलाश में वह काफी देर तक एक मकान की चारदीवारी पर बैठा रहा। इससे पहले 2 अगस्त की रात खदाना मोहल्ले में भी तेंदुए की मौजूदगी देखी गई थी।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, सुबह करीब साढ़े चार बजे गली में तेंदुआ दिखाई दिया, जिसके बाद पूरे इलाके में डर का माहौल बन गया। लोगों ने आशंका जताई कि तेंदुआ आसपास ही कहीं छिपा हो सकता है, जिसके चलते वे घरों से बाहर निकलने से बचते रहे। हालांकि, काफी तलाश के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिल सका।

वन विभाग के रेंजर शंकर सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में दोनों जगह दिखाई दिया तेंदुआ एक ही होने की संभावना है। लादिया और आसपास का इलाका सरिस्का के बफर जोन और जंगल से सटा हुआ है, जिसके कारण तेंदुए अक्सर भोजन की तलाश में आबादी की ओर आ जाते हैं। खदाना मोहल्ले से सामने आए वीडियो की भी जांच की जा रही है।
वन विभाग के अनुसार, लादिया और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए अक्सर आवारा कुत्तों का शिकार करने पहुंचते हैं। इसी वजह से रात में कुत्तों के अचानक भौंकने की घटनाएं आम हैं। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले भी रात के समय छतों से तेंदुए की हलचल देखी है, लेकिन अधिकतर मामलों में इसकी पुष्टि सीसीटीवी फुटेज से ही हो पाती है।
अलवर शहर की पुरानी बस्तियां पहाड़ियों की तलहटी में बसी हैं, जिसके कारण यहां लंबे समय से तेंदुओं की आवाजाही बनी हुई है। मूसी महारानी की छतरी के आसपास भी कई बार तेंदुए को कुत्तों का शिकार करते देखा गया है। करीब दो-तीन साल पहले एक तेंदुआ शहर की एक कॉलोनी में घरों के अंदर तक घुस गया था, जिसे सरिस्का की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया था।
अलवर से सटे बाला किला और सरिस्का के बफर क्षेत्र में बड़ी संख्या में वन्यजीव पाए जाते हैं। बरसात के मौसम में घनी हरियाली के कारण इनकी गतिविधियां कम नजर आती हैं, लेकिन वन विभाग ने लोगों को रात के समय जंगल और पहाड़ी इलाकों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।
