पेपर लीक मुद्दे पर गहलोत का बड़ा बयान, भाजपा सरकार को ठहराया जिम्मेदार
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भाजपा पर युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों का ठोस जवाब देने के बजाय झूठे आंकड़े गढ़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि 2013–18 के भाजपा शासनकाल में 12 पेपर लीक हुए, लेकिन तब न कोई कठोर कानून बना, न बड़ी गिरफ्तारी हुई; उल्टा सरकार ने कार्रवाई न करके पेपर लीक माफिया को बढ़ावा दिया।
कठोर कानून और सख्त कार्रवाई का दावा
गहलोत ने बुधवार जारी बयान में कहा कि कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ देश का सबसे कठोर कानून बनाया। 2022 में लाए गए इस कानून में आजीवन कारावास, संपत्ति जब्ती और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया, जिससे राजस्थान आजीवन कारावास की सजा देने वाला पहला राज्य बना।
उनका कहना है कि कांग्रेस सरकार ने बिना किसी को बख्शे कार्रवाई की—आरपीएससी के पदस्थ सदस्य तक को गिरफ्तार करवाया, पेपर माफिया की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलवाया, दोषी कर्मचारियों को बर्खास्त किया, प्रभावित परीक्षाएं रद्द कर तुरंत पुनर्परीक्षा करवाई और युवाओं को नौकरियां दीं। इतनी सख्ती से मामलों में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई कि वे अभी भी जेल में हैं।

ओएमआर घोटाले पर सवाल
गहलोत ने भाजपा सरकार से सवाल किया कि आरएसएसबी की परीक्षाओं में ओएमआर शीट बदलने वाले गिरोह के भंडाफोड़ के बाद वह चुप क्यों है। उन्होंने कहा कि एसओजी ने बोर्ड के तकनीकी प्रमुख तक को गिरफ्तार किया है, लेकिन सरकार अपने कार्यकाल की परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच की घोषणा से भाग रही है, जिस वजह से ओएमआर घोटाले के आरोपी जमानत पर बाहर आ गए।
उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठियां बरसाने और ओएमआर घोटाले को दबाने वाली सरकार के नेताओं के पास कांग्रेस से सवाल पूछने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। गहलोत ने मांग की कि भाजपा सरकार स्पष्ट करे कि ओएमआर घोटाले की जांच कब कराई जाएगी।
