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जयपुर: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज की कड़ी आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
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‘छात्र देश का भविष्य हैं, अपराधी नहीं’
सोमवार को जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान जूली ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए, उनके कपड़े फाड़े गए और उनके साथ मारपीट की गई।
उन्होंने कहा, “ये छात्र हमारे अपने बच्चे हैं। यह महात्मा गांधी का देश है। क्या अब गांधी के देश में भी शांतिपूर्ण अनशन और प्रदर्शन करने के लिए अनुमति लेनी पड़ेगी?”
पेपर लीक पर केंद्र सरकार को घेरा
टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया है। उनका आरोप था कि शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।
‘लोकतंत्र कमजोर किया जा रहा है’
जूली ने कहा कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर कर रही है और विरोध की आवाज को दबाने के लिए सख्त कार्रवाई कर रही है।
उन्होंने कहा, “जिन युवाओं ने इस सरकार को सत्ता तक पहुंचाया था, वही युवा अब इसके खिलाफ खड़े हो रहे हैं। युवाओं की आवाज को लाठी और आंसू गैस से दबाया नहीं जा सकता।”
राहुल गांधी के समर्थन का किया जिक्र
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा छात्र आंदोलन के समर्थन पर पूछे गए सवाल के जवाब में जूली ने कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से छात्रों और युवाओं के मुद्दे उठा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने कोटा से ‘छात्रों की गूंज’ अभियान की शुरुआत की थी और अब देशभर में युवाओं की समस्याओं को सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी हाल ही में देहरादून में आयोजित छात्रों के एक कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे।
शिक्षा व्यवस्था में असमानता पर चिंता
टीकाराम जूली ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यदि युवाओं को समान अवसर तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिली, तो इसका असर देश के भविष्य पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि आज भी शिक्षा व्यवस्था में भारी असमानता है। एक ओर ऐसे छात्र हैं जो आधुनिक संसाधनों, लैपटॉप और महंगी कोचिंग की सुविधा के साथ पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर गांवों के कई छात्र सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में अपनी पढ़ाई जारी रखने को मजबूर हैं।
शिक्षा नीति में व्यापक सुधार की मांग
जूली ने केंद्र सरकार से शिक्षा नीति में व्यापक सुधार करने की मांग करते हुए कहा कि सभी विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो देश की युवा शक्ति का सही दिशा में उपयोग नहीं हो पाएगा।
