पेपर लीक मामले में कांग्रेस अपना रही है दोहरा मापदंड: भाजपा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। पार्टी ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे के बयान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे राज्यसभा में पेपर लीक के मुद्दे पर लंबा भाषण देते हैं, लेकिन अपने ही बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे की विवादित टिप्पणी पर न तो वह कुछ बोल रहे हैं और न ही राहुल गांधी कोई प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि प्रियांक खरगे ने कर्नाटक में पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को लेकर असंवेदनशील और अहंकारपूर्ण बयान दिया। उनके अनुसार, प्रियांक खरगे ने कथित तौर पर कहा था, “पहले छात्रों को 25 दिन तक भूख हड़ताल करने दीजिए, उसके बाद हम लाठीचार्ज करेंगे और फिर इस्तीफे पर विचार करेंगे।” इस बयान को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है।

भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा कि राहुल गांधी इस मुद्दे पर अब तक चुप हैं, जबकि कांग्रेस संसद की कार्यवाही को बाधित करने में लगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मानसून सत्र को सुचारू रूप से चलने नहीं दे रहे, जबकि संसद के प्रत्येक सत्र पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। पात्रा के अनुसार, सत्र शुरू होने के बाद से प्रश्नकाल प्रभावी ढंग से नहीं चल पाया है और कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा भी नहीं हो सकी है।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस के इस दोहरे रवैये से मैं हैरान हूं। संसद चलाने में भारी खर्च होता है, लेकिन शुरुआत से ही शून्यकाल और सदन की कार्यवाही को बाधित करने की कोशिश की जा रही है। समस्या कांग्रेस और उसके सहयोगियों के व्यवहार में है।”
संबित पात्रा ने झारखंड में जारी छात्र आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां हजारों छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस ने उनके समर्थन में एक शब्द तक नहीं कहा और न ही इस मुद्दे को संसद में उठाया।
उन्होंने कांग्रेस पर चयनात्मक आक्रोश का आरोप लगाते हुए कहा, “झारखंड में जेपीएससी परीक्षा को लेकर कांग्रेस नेताओं के हाथों में एक भी प्लेकार्ड नहीं दिखा। यह साफ तौर पर चयनात्मक आक्रोश का उदाहरण है।”
